बाला जी के १० महत्व को जानिये

 

Sunil Misra NETVANI :- भारत वर्ष दुनिया में धर्म और कर्म के क्षेत्र में अपने सर्वधर्म के लिए मशहूर है यहां बहुत पुराने और बहुत बड़े बड़े और विशाल धार्मिक स्थल एवं विशाल मंदिरों का निर्माण किया गया हैं जिनमे भारत के कई मंदिर हैं जो की हज़ारों साल पुराने नक्काशियों से बनाए गए है उनमे से कई मंदिर हैं उनमे से एक तिरुपति बाला जी मंदिर हिंदुओं का सबसे मशहूर तीर्थ मंदिर है यहां दुनिया के बड़े बड़े साधू महात्मा और भारतीय सैलानियों एवं विदेशी पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है और तिरुपति बाला जी सृष्टि के सबसे अमीर भगवान में से एक माने जाते है श्रद्धालु इस मंदिर में अपनी मनोकामना पूर्ण करने का स्थल मानते है और मनोकामनाए पूरी भी होती है इसी लिए इस मंदिर में हमेशा श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है इसे लोगो की भरपूर श्रद्धा मानी जानी चाहिए जहां अक्सर लोग दिल खोलकर चढ़ावा चढ़ाते हैं और लोग दर्शन करते हैं हिन्दुओं की श्रद्धा का प्रतीक है वो पवित्र तिरुपति का बालाजी मंदिर….
हिन्दुओं की श्रद्धा और आस्था की डोर भक्तों को भगवान बालाजी के दर खींच लाती है यहां आकर भक्त और भगवान के बीच की दूरियां मिट जाती हैं और भगवान तिरुपति बालाजी में भक्तों की अटूट आस्था को देखते हुए नेता से लेकर अभिनेता तक, और आम से लेकर खास तक सभी भगवान वेंकेश्वर के दर पर शीश झुकाए खड़े रहते हैं इसी आस्था के बल पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जब-जब मौका मिलता है वो भी भगवान के दरबार में खिंचे चले आते हैं एक अनुमान के मुताबिक रोजाना करीब 50 हज़ार लोग बालाजी के दर पर हाज़िरी लगाते हैं
इस दर पर दावा किया जाता है कि इस मंदिर में भक्तों को भगवान बालाजी की बिल्कुल जीवंत रूप की अनुभूति होती है इस मंदिर के बारे में भव्य प्रचलित मान्यताएं भी लोगों को अपनी तरफ खूब आर्कषित करती हैं….
मान्यता नंबर-1
कहा जाता है कि मंदिर में वेंकेटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर लगे बाल बिल्कुल असली हैं और ये बाल कभी भी आपस में उलझते नहीं हैं…ये हमेशा मुलायम रहते हैं लोगों का मानना है कि ये सभी असली है क्योंकि इस प्रतिमा में साक्षात भगवान विराजते हैं।
मान्यता नंबर-2
मंदिर में भगवान बालाजी की मूर्ति को लेकर एक दावा लोगों को खूब आकृषित करता है जिसे महूसस करने के लिए लोग सात समंदर पार से खिंचे चले आते हैं बताया जाता हैं कि अगर आप मंदिर की मूर्ति पर कान लगाकर सुनें तो मूर्ति के अंदर से संमदर की लहरों की आवाज़े सुनाई देंगी माना जाता है कि इस वजह से बालाजी की मूर्ति हमेशा गीली रहती है…
मान्यता नंबर-3
मंदिर के मुख्य दरवाजे के दाई ओर रखी एक छड़ी को लेकर भी एक कथा काफी प्रचलित है इस छड़ी के बारे में कहा जाता है कि इस छड़ी से भगवान बालाजी जी की बाल रूप में पिटाई की गई थी जिसके कारण उसकी ठोडी पर चोट लग गई थी इस वजह से उनकी ठोडी पर चंदन का लेप लगाया जाता है माना जाताहै कि ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि ठोडी पर लगा घाव भर जाए….
मान्यता नंबर-4
बालाजी के इस मंदिर में एक दीया हमेशा जलता रहता है दावा है कि इसमें ना कभी तेल डाला जाता है और ना ही कभी घी भरा जाता है दिलचस्प बात ये है कि ये दीया किसने और कब चलाया इसका भी आज तक किसी को नहीं पता, बस श्रद्धा और आस्था का ये दीया सालों से इसी तरह जल रहा है….
मान्यता नंबर-5
मंदिर में विराजमान भगवान बालाजी जी की प्रतिमा भी भक्तों का ध्यान खूब खींचती है क्योंकि जब इस मूर्ति को गर्भगृह से देखेंगे तो भगवान की मूर्ति गर्भगृह के मध्य में दिखाई देगी लेकिन जब इसे मंदिर के बाहर आकर देखेंगे तो पाएंगे कि ये मूर्ति मंदिर के दाईं ओर स्थित है
मान्यता नंबर- 6
कहा जाता है कि भगवान बालाजी की इस प्रतिमा पर एक ख़ास तरह का पचाई कपूर लगाया जाता है इस कपूर को अगर किसी दूसरे पत्थर पर लगाया जाए तो वो थोड़ी ही देर में चटक जाएगा लेकिन भगवान बालाजी की प्रतिमा को इससे कोई नुकसान नहीं पहुंचता है
मान्यता नंबर-7
मान्यता है कि हर गुरुवार को भगवान की पूरी प्रतिमा को चंदन का लेप लगाया जाता है लेकिन जब इस चंदन को हटाया जाता है तो वहां खुद ब खुद माता लक्ष्मी की प्रतिमा उभर आती है आखिर ये क्यों होता है ये कोई नहीं जानता लेकिन सालों से सिलसिला इसी तरह चल रहा है….
मान्यता नंबर-8
बताते हैं कि ये दुनिया का अकेला ऐसा मंदिर हैं जहां भगवान को पुरुष और स्त्री दोनों के वस्त्र चढ़ाए जाते हैं बालाजी को नीचे धोती और ऊपर साड़ी सजाई जाती है..
मान्यता नंबर-9
कहा जाता है कि मंदिर से 23 किलोमीटर दूर एक गांव है जिसमें बाहरी लोगों का आना बिल्कुल मना है कहते हैं इसी गांव से लाए गए फूल और वस्तुएं भगवान वेंकेटेश्वर को चढ़ाई जाती है पूजा में भी इस गांव के दूध घी और फलों का इस्तेमाल होता है….
मान्यता नंबर-10
मंदिर में भगवान की मूर्ति पर जितने भी फूल या तुलती के पत्ते चढ़ाए जाते हैं उन्हें आम मंदिरों की तरह भक्तों को ना देकर मंदिर के पीछे मौजूद जलकुंड में प्रवाहित किया जाता है
कह सकते हैं कि इस मंदिर को लेकर अनगिनत ऐसी मान्यताएं हैं जो भगवान बालाजी में भक्तों की आस्था को अटूट बनाती हैं

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