डॉक्टरों की समस्या को अब रुस करेगा दूर!

Vinod Sharma, NewDelhi  :देश में डॉक्टरों की क़िल्लत और मेडिकल में कम सीटों की संख्या केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए चुनौती बना हुआ है । 2019 में नीट के तहत जारी रिज़ल्ट भी अच्छा संकेत नहीं दे रहा है । 15.19 लाख शामिल छात्रों में से आठ लाख छात्र नीट एक्ज़िमा क्वालीफ़ाई कर पाए हैं । ऐसे में इन अभी आठ लाख छात्रों को देश के मेडिकल कॉलेजों मे दाखिला मिलना मुश्किल है। देश मे मात्र 63,000 सीटों वाली मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर बनने का सपने रखने वाले छात्र परेशान हैं । लिहाज़ा बड़े मेडिकल एजुकेशन में संभावना तलाशने के लिए रूस के टॉप मेडिकल यूनिवर्सिटी ने भारत का रूख किया है । दिल्ली के फ़िरोज़ शाह स्थित रूस एजुकेशन एंड कल्चर सेंटर में रूस के बड़े यूनिवर्सिटियों ने भारतीय छात्रों के लिए मेडिकल दाख़िले का पिटारा खोल दिया है । एमसीआई के गाइडलाइन और सिलेबल के मुताबिक़ डिग्री कोर्स में भारतीय छात्र एडमिशन लेकर भारत में डॉक्टर बन सकते हैं ।

देश के मेडिकल कॉलेजों में प्रोफ़ेसरों की संख्या बढ़ाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पीजी डिप्लोमा को डिग्री कोर्स में तो ज़रूर तब्दील कर दिया लेकिन ना तो मेडिकल में सीटों की संख्या बढ़ी और ना ही डिग्री जून: उच्च शिक्षा में नामांकन के लिए अधिक भारतीय छात्रों को आकर्षित करने के लिए, 9 जून से देश भर में रूसी शिक्षा मेले का आयोजन किया जा रहा है, जहां छात्रों को शीर्ष रूसी के प्रत्यक्ष प्रतिनिधियों से मुफ्त कैरियर परामर्श लेने की सुविधा दी जा रही है । मालूम हो कि इस वर्ष NEET के लिए लगभग 15.19 लाख अभ्यर्थी उपस्थित हुए, जो कि अपने आप में एक बड़ी संख्या है। अब, जब परिणाम समाप्त हो गया है, तो छात्रों ने भारत या विदेश में NEET के बाद विकल्पों की तलाश शुरू कर दी है। चूंकि, शीर्ष चिकित्सा विश्वविद्यालय (विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि) भारत आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह छात्रों के लिए जीवन भर के लिए एक सुनहरा अवसर है और रूस में चिकित्सा शिक्षा की तलाश है।

परंपरागत रूप से, 90 प्रतिशत भारतीय छात्र चिकित्सा संस्थानों में अध्ययन करने के लिए रूस जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.