दिल्ली के उत्तर-पुर्वी सीट पर पुर्वांचली उम्मीदारों की टक्कर

दो पीढ़ियों के राजनीतिज्ञ… कौन मारेगा बाजीं

मौजूदा सांसद मनोज तिवारी का सामना पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से

 

प्रिया दीक्षित, नई दिल्ली: नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली इस वक्त देश की राजधानी की वीआईपी सीट है, जहां से तीनों पार्टियों ने अपना सबसे मजबूत दांव खेला है। पूर्वांचली वोटरों की ताकत को देखते हुए यहां से यूपी-बिहार के उम्मीदवारों को उतारा गया है। मौजूदा सांसद मनोज तिवारी का सामना कांग्रेस की शीला दीक्षित और आप के दिलीप पांडे से है।  खास बात ये है कि ये तीनों ही नेता अपने-अपने दलों के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।

इस संसदीय क्षेत्र के तहत बुरारी, तिमारपुर, सीमापुरी, रोहतास नगर, सीलमपुर, घोंडा, बाबरपुर, गोकलपुर, मुस्तफाबाद और करावल नगर जैसे इलाके आते हैं. 2014 के चुनाव में इस सीट से मनोज तिवारी को 5,96,125 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर रहे थे आम आदमी पार्टी के प्रो. आनंद कुमार जिन्हें 4,52,041 वोट मिले थे वहीं 2,14,792 वोटों के साथ कांग्रेस के जेपी अग्रवाल तीसरे स्थान पर रहे थे. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष जे पी अग्रवाल इस सीट से 2009 में सांसद रह चुके हैं.

जानकारी यह है की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के मैदान में उतरने से विपक्षी दल ही नहीं बल्कि पार्टी के कार्यकर्ता भी हैरान रह गए थे। इससे नॉर्थ-ईस्ट की सीट पर दावेदारी करने वाले कैंडिडेट ‘उखड़’ गए।   मुख्यमंत्री रहते शीला दीक्षित ने बहुत से लोग कमाए हैं, जो फिर उनसे जुड़  गए हैं।

इस सीट से भोजपुरी गायक मनोज तिवारी ने 2014 में ‘कमल’ का दामन थामा था। मोदी लहर थी, लेकिन वह राजनीति के नए खिलाड़ी थे। वह सांसद बने और फिर बीजेपी ने उन्हें दिल्ली का ‘सर्वेसर्वा’ भी बनाया। अब पांच साल बाद पार्टी के कई नेता और वर्कर उनके करीब आए हैं तो कई खिलाफ भी हो चुके हैं। ऐसे में इन सबको साधना उनके लिए एक चुनौती है।  यह जरूर है कि तिवारी ने पांच साल में कई नए लोगों बीजेपी से जोड़ा है। वह झुग्गी-झोपड़ियों में रात भर रहे हैं। गोकलपुर गांव में ‘सील’ तोड़ने का असर ये रहा कि इस चुनाव में वहां के युवा आज उनके साथ खड़े हैं।

पिछले छह महीने से आम आदमी पार्टी नॉर्थ ईस्ट दिल्ली लोकसभा सीट पर काम कर रही थी। दिलीप पांडेय यहां काफी समय से सक्रिय हैं। ‘आप’ के रणनीतिकारों को कांग्रेस की तरफ से वह कोई बहुत ज्यादा चुनौती मिलने का आभास नहीं था। शीला दीक्षित के आन के बाद आम आदमी पार्टी नए सिरे से अपनी स्ट्रैटिजी पर काम कर रही है।

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